शनिवार, 27 जून 2009

मनोहरी /लग्न सुदर्शन पद्धति परिचय

मे कुण्डली के १२ भावों को १२ वर्षो के चक्र के रूप में अध्ययन किया जाता है । अर्थात प्रथम भावः से जीवन का प्रथम, तेहरावा, पचिसवा, सैंतीसवा आदि वर्षो का अध्ययन किया जाता है .यदि हमे तीसरे साल का फलादेश देखना है तो हम इसके लिए लिए तीसरे भावः को लग्न के रूप मे देखेंगे, इसी क्रम मे बाकि के भावों का अध्ययन करेंगे ।
इस प्रकार बारह वर्ष बाद वही भावः पुनः लग्न का स्थान पायेगा, वर्षफल अध्ययन के समय गोचर और ग्रहदशा का भी ध्यान रखा जाता है,
मै व्यकतिगत रूप से इस पद्धति से काफी संतुष्ट हू।

आपके विचार सदर आमंत्रित है
शेष फिर
आपका ज्योतिष्य मित्र
घनश्याम सिंह राठौर

सोमवार, 17 दिसंबर 2007

my astrological view

hi everyone
i m here for share my hobby- astrology, i m basically a vedic n kp astrologer but i welcome different views bcz i think the knowladage is limitless n infinite.
i can help needy people from my art of astrology without any charges.
so plz help me in the great mission of astrology for huminity n culture.

astrologically yours
ghanshyamastrologer